आरएसएस की एक कार्यका
री टीम बहुत जल्दी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और
दूसरे विपक्षी नेताओं के दफ़्तर पहुंच सकती है. दरअसल, अगले सप्ताह आरएसएस
की एक तीन दिवसीय 'लेक्चर सिरीज़' राजधानी में आयोजित होने वाली है तो
आरएसएस ने इसके लिए विपक्ष को भी न्योता देने का फ़ैसला किया है.
इस
कार्यक्रम की अध्यक्षता आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत करेंगे, जिसमें संघ के
बारे मे लोगों को बताया जाएगा. इस कार्यक्रम के लिए 60 देशों को भी
निमंत्रण दिया गया है लेकिन इन 60 देशों में पाकिस्तान का नाम नहीं है.
कोच्चि में नन के साथ कथित रेप के मामले में पुलिस ने बिशप फ्रैंको
मुल्लकल को सम्मन भेजकर 19 सितंबर को हाज़िर होने को कहा है. हालांकि बिशप
मुलक्कल ने दावा
किया कि उनके ख़िलाफ़ लगे सभी आरोप झूठे हैं.
लेकिन
पुलिस को जो शिकायत मिली है उसमें नन ने ये दावा किया है कि मई 2014 से
लेकर सितंबर 2016 के बीच बिशप फ़्रैंको मुलक्कल ने कई बार उनका यौन शोषण
किया.
इसके अलावा आम लोगों से सीधे तौर पर जुड़ी एक और ख़बर है. केंद्र सरकार ने भारतीय रेलवे की ब्रॉड गेज रेल लाइनों के शत प्रतिशत विद्युतीकरण को मंजूदी दे दी है.
इसके
तहत 13 हजार 675 किलोमीटर रेल लाइन का विद्युतीकरण किया जाएगा. केंद्रीय
मंत्रिमंडल के आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में यह फ़ैसला किया गया. द हिंदू अख़बारमैं पानी लेने नहीं जाता तो आज उसकी (विशाल) जगह मैं भी हो सकता था.''
21
साल के प्रदीप कुमार उ
र्फ़ सोनू, विशाल के दोस्त हैं. विशाल उन पांच लोगों
में शामिल थे जिनकी मौत दिल्ली के मोती नगर में सीवर साफ़ करने के दौरान
ज़हरीली गैस से दम घुटने की वजह से हुई थी.
9 सितम्बर को हुए हादसे
को याद करते हुए सोनू एक सांस में बताते चले जाते हैं. दिल्ली के मोती नगर
इलाके में एक सोसाइटी में सीवर टैंक साफ करने उतरे 6 मज़दूरों में से 5 की
मौत हो गई थी.
दोपहर के पौने दो बज रहे थे उनकी शिफ़्ट खत्म होने वाली थी.
सुबह
सात बजे से दो बजे तक की शिफ़्ट लगी हुई थी. घर जाने की तैयारी कर ही रहे
थे कि इतने में शिफ़्ट इंचार्ज दिगम्बर सिंह आकर कहते हैं कि आप लोगों को
टैंक में उतरना पड़ेगा. हमने उन्हें साफ़ मना कर दिया था कि ये हमारा काम
नहीं है. लेकिन उन्होंने हमारे बाद आने वाले दूसरी शिफ़्ट के लोगों के
साथ हमें ज़बरदस्ती उतार दिया. हम भी ये सोचकर उतर गए कि 2 बजे शिफ़्ट खत्म हो
जाएगी तो थोड़ी देर की ही बात हैं. हमने इससे पहले कभी ऐसा काम नहीं किया
था इसलिए हमें इसकी भनक भी नहीं थी कि ये इतना ख़तरनाक हो सकता था.
इस तरह के टैंक में उतरने के लिए किस तरह की सेफ़्टी अपनानी पड़ती है
हमें कुछ नहीं पता था. मैं और विशाल सबसे पहले एक ही टैंक में उतर गए, जो
20 फ़ीट से भी ज़्यादा गहरा था. थोड़ी देर बाद विशाल को प्यास लगी.
उसने
मुझे ये कह कर भेज दि
या कि तुम पानी पी भी आना और ले भी आना इसके साथ टाइम
देख लेना क्योंकि हमारे पास फ़ोन नहीं था इसलिए हमें समय का पता ही नहीं
था.
जब मैं पानी लेकर आया और विशाल को आवाज़ दी तो दूसरी तरफ से कोई आवाज़
नहीं आई. ठीक से देखा तो टैंक में मौजूद एक और छोटी सी सीढ़ी थी जिस पर
विशाल लेटा हुआ था.
विशाल पूरी तरह होश में नहीं था वो मुझसे कहने लगा कि मेरी छाती में दर्द हो रहा है और सांस नहीं आ रही है.''
''इतना देख दूसरे दोस्त ने कमर में रस्सी बांधी और टैंक में उतर गया. विशाल को बाहर निकाला गया और अस्पताल ले कर भागे.''
एंबुलेंस
में उसे होश था और वो यही कह रहा था कि मुझे सांस नहीं आ रही. एंबुलेंस
में ऑक्सीजन भी नहीं थी. पहले एक प्राइवेट अस्पताल ले कर गए और जहां से
विशाल को दिल्ली के सरकारी हॉस्पिटल आरएमएल (राम मनोहर लोहिया) में रेफर कर
दिया गया, वहीं शाम को विशाल को सीवर
में मौजूद ज़हरीली गैस के कारण मृत
घोषित कर दिया गया.
जब हम विशाल के घर पहुंचे तो गली में सन्नाटा था विशाल के घर के बाहर उसके भाई और एक दो लोग मौजूद थे.
वे हमें टकटकी लगाए ऐसे देख रहे थे जैसे सामने आने वाला व्यक्ति ही उन्हें इंसाफ़ दिलाएगा.धूरा सा बना घर इतना छोटा था कि वहां सही से चार लोगों के बैठने की जगह
भी नहीं थी इसलिए अंगद, जो विशाल के भाई हैं वे हमें पड़ोसी के घर ले जाकर
बैठा देते हैं.
वहां मौजूद विशाल के पिता आंखों में आंसू लिए गुमसुम
बैठे हैं. हमारे जाते ही वे हमसे साफ़ कह देते हैं जो भी बात करनी है मेरे
बेटे से करें. मैं कुछ कह नहीं पाऊंगा.
लिखता है कि भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में अभियुक्त पांच मानवाधिकार
कार्यकर्ताओं की नजरबंदी को सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर तक के लिए
बढ़ा दिया है.
हालांकि मृतकों के परिवारवालों का कहना है कि इनमें से किसी का भी काम
सीवर की सफ़ाई करना नहीं था. ये सभी दूसरे काम के लिए हायर किए गए थे, जैसे
हाउसकीपिंग, हेल्पर और पंप ऑपरेटर.
मृतकों में 19 साल के विशाल के
अलावा इनमें राजा (20), सरफ़राज
(19), उमेश (22) और पंकज (26) शामिल थे.
पंकज और उमेश उत्तर प्रदेश से रोज़गार के लिए आए थे, जबकि राजा और सरफ़राज
बिहार से थे.
9 सिंतबर को दिल्ली के मोतीनगर के डीएलएफ ग्रीन
अपार्टमेंट्स में सीवर टैंक की मरम्मत का काम चल रहा था, जिसका कॉन्ट्रैक्ट
जेएलएल (जॉन्स लांग ला-साल) को दिया गया था और जेएलएल ने इसका काम उन्नति
इंजीनियरिंग एंड कॉन्ट्रेक्टर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया था.
सभी मृतक उन्नति के लिए काम करते थे, जिसमें विशाल लगभग छह महीने से पंप
ऑपरेटर का काम करते थे. उन्हें हर महीने की सैलरी चेक से दी जाती थी.
वहां मौजूद विशाल के बड़े भाई अंग
द ने हमें बताया कि वो तो रविवार को जाता भी नहीं था. लेकिन उस दिन उसे फ़ोन करके बुलाया गया.
दिल्ली
के मंगोलपुरी में रहने वाले विशाल के परिवार में पापा-मम्मी के अलावा तीन
बड़ी बहनें और एक बड़ा भाई हैं. दो बहनें शादीशुदा हैं.
"पढ़ाई में वो खास़ नहीं था लेकिन हमेशा से कुछ करना चाहता था", ये कहते हुए अंगद फूट-फूटकर रोने लगते हैं.
इस घटना पर मोती नगर के एसएचओ मनमोहन सिंह बताते हैं कि हमने इस मामले में 33 साल के अजय चौधरी को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
अजय
जेएलएल के इंजीनियर हैं. उन पर गैर इरादतन हत्या, लाप
रवाही के कारण मौत और
एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज़ कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की
जा रही है.