जब हालात शांतिपूर्ण थे, उस दौर को याद करते हुए फ़ुरक़ानी कहते हैं,
"पाकिस्तान से युद्ध हमेशा घाटी में तनाव लेकर आया है. 2003 में भारत पाक
के बीच हुआ सीज़फायर समझौता कश्मीर में शांति लेकर आया था."
शोधकर्ता बिस्मा भट कहती हैं, "भारत-पाक युद्ध में कश्मीरियों का कुछ भी दांव पर नहीं होता. भले ही सर्जिकल स्ट्राइक हुई, लेकिन यहां ज़मीनी हालात ख़राब होने से उसका लक्ष्य पूरा नहीं हुआ. इस सर्जिकल स्ट्राइक से पहले लोग चरमपंथियों के समर्थन में एनकाउंटर की जगहों पर दौड़े-दौड़े नहीं जाते थे. इन सर्जिकल स्ट्राइक से और कुछ नहीं, सिर्फ चरमपंथी हिंसा के लिए आम लोगों का समर्थन बढ़ा है. "
भारत के लिए कश्मीर लंबे समय से एक बड़ी राजनीतिक समस्या है. भारत की सरकारें ये कहती रही हैं कि पाकिस्तान कश्मीर में चरमपंथी हिंसा पाकिस्तान की फंडिंग पर फल-फूल रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने से पहले से ही मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 'आक्रामक रक्षा' (ऑफेंसिव डिफेंस) की नीति की वक़ालत करते रहे हैं.
हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने ख़ुद नरम शुरुआत करते हुए नवाज़ शरीफ़ को अपने शपथ ग्रहण समारोह का न्योता दिया था. फिर एक दिन वह विदेश यात्रा से लौटते हुए अचानक नवाज़ शरीफ़ के एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने पाकिस्तान जा पहुंचे थे.किन फिर भारत में सैन्य ठिकानों पर दो बड़े चरमपंथी हमले हुए. पंजाब के पठानकोट और जम्मू-कश्मीर के उरी में हुए हमलों में बीस सैनिकों की मौत हो गई और नरमी की ओर बढ़ रहे दोनों देशों के संबंधों में फिर तल्ख़ी आ गई.
इसी के बाद भारत ने एलओसी के उस पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने का दावा किया और केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चरमपंथियों और उनसे सहानुभूति रखने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त नीति अपनाई.
हालांकि भारत प्रशासित कश्मीर में अधिकांश और नई दिल्ली में भी कुछ लोग यह मानते हैं कि भारत की आक्रामक सैन्य नीति के उल्टे नतीजे मिले हैं.
गर्भ निरोधक गोलियां खाने वाली ज़्यादातर महिलाएं नहीं जानतीं कि वो एक गोली के साथ आठ तरह के हार्मोन निगलती हैं. इन आठ हार्मोन्स में से कुछ ऐसे भी हैं जो शरीर को मर्दाना पहचान देने लगते हैं.
दावा किया जाता है कि गर्भनिरोधक गोलियों में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन होता है. जबकि सच्चाई ये है कि किसी भी गोली में ये क़ुदरती हार्मोन नहीं होते. बल्कि इन हार्मोन का सिंथेटिक वर्जन गोली में डाला जाता है. जोकि नेचुरल हार्मोन से ज़्यादा स्थाई होता है.
हर गर्भ निरोधक गोली में एक ही तरह के सिंथेटिक एस्ट्रोजन, एथीनील एस्ट्रॉडिऑल और प्रोजेस्टेरोन होते हैं. एथीनील एस्ट्रॉडिऑल हर महीने बच्चेदानी में अंडाणु विकसित होने से रोकता है.
जबकि प्रोजेस्टेरोन बच्चेदानी के मुहाने पर मोटी परत जमा देता है, जिससे बच्चेदानी में स्पर्म के लिए कोई जगह नहीं रह पाती.
इत्तिफ़ाक़ से अगर कोई अंडाणु गर्भाशय के अंदर चला भी जाता है तो वो वहां विकसित नहीं हो पाता. और बेकार होकर माहवारी के रक्त के साथ बाहर निकल जाता है. यहां तक तो हार्मोन की कहानी तसल्लीबख़्श है.
शोधकर्ता बिस्मा भट कहती हैं, "भारत-पाक युद्ध में कश्मीरियों का कुछ भी दांव पर नहीं होता. भले ही सर्जिकल स्ट्राइक हुई, लेकिन यहां ज़मीनी हालात ख़राब होने से उसका लक्ष्य पूरा नहीं हुआ. इस सर्जिकल स्ट्राइक से पहले लोग चरमपंथियों के समर्थन में एनकाउंटर की जगहों पर दौड़े-दौड़े नहीं जाते थे. इन सर्जिकल स्ट्राइक से और कुछ नहीं, सिर्फ चरमपंथी हिंसा के लिए आम लोगों का समर्थन बढ़ा है. "
भारत के लिए कश्मीर लंबे समय से एक बड़ी राजनीतिक समस्या है. भारत की सरकारें ये कहती रही हैं कि पाकिस्तान कश्मीर में चरमपंथी हिंसा पाकिस्तान की फंडिंग पर फल-फूल रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने से पहले से ही मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 'आक्रामक रक्षा' (ऑफेंसिव डिफेंस) की नीति की वक़ालत करते रहे हैं.
हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने ख़ुद नरम शुरुआत करते हुए नवाज़ शरीफ़ को अपने शपथ ग्रहण समारोह का न्योता दिया था. फिर एक दिन वह विदेश यात्रा से लौटते हुए अचानक नवाज़ शरीफ़ के एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने पाकिस्तान जा पहुंचे थे.किन फिर भारत में सैन्य ठिकानों पर दो बड़े चरमपंथी हमले हुए. पंजाब के पठानकोट और जम्मू-कश्मीर के उरी में हुए हमलों में बीस सैनिकों की मौत हो गई और नरमी की ओर बढ़ रहे दोनों देशों के संबंधों में फिर तल्ख़ी आ गई.
इसी के बाद भारत ने एलओसी के उस पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने का दावा किया और केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चरमपंथियों और उनसे सहानुभूति रखने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त नीति अपनाई.
हालांकि भारत प्रशासित कश्मीर में अधिकांश और नई दिल्ली में भी कुछ लोग यह मानते हैं कि भारत की आक्रामक सैन्य नीति के उल्टे नतीजे मिले हैं.
असुरक्षित सेक्स से महिलाएं गर्भ धारण
कर सकती हैं. इससे बचने का बेहद लोकप्रिय तरीक़ा है गर्भ निरोधक गोलियां.
कुछ गोलियों को खाने के बाद लोग आज़ादी से सेक्स को एन्जॉय कर सकते हैं.
महिलाएं बेफ़िक्र हो सकती हैं कि वो प्रेग्नेंट हो जाएंगी. गर्भ धारण करने में
हार्मोन का बड़ा रोल होता है और ये गोलियां उन हार्मोन्स को काम करने से
रोकती हैं.गर्भ निरोधक गोलियां खाने वाली ज़्यादातर महिलाएं नहीं जानतीं कि वो एक गोली के साथ आठ तरह के हार्मोन निगलती हैं. इन आठ हार्मोन्स में से कुछ ऐसे भी हैं जो शरीर को मर्दाना पहचान देने लगते हैं.
दावा किया जाता है कि गर्भनिरोधक गोलियों में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन होता है. जबकि सच्चाई ये है कि किसी भी गोली में ये क़ुदरती हार्मोन नहीं होते. बल्कि इन हार्मोन का सिंथेटिक वर्जन गोली में डाला जाता है. जोकि नेचुरल हार्मोन से ज़्यादा स्थाई होता है.
हर गर्भ निरोधक गोली में एक ही तरह के सिंथेटिक एस्ट्रोजन, एथीनील एस्ट्रॉडिऑल और प्रोजेस्टेरोन होते हैं. एथीनील एस्ट्रॉडिऑल हर महीने बच्चेदानी में अंडाणु विकसित होने से रोकता है.
इत्तिफ़ाक़ से अगर कोई अंडाणु गर्भाशय के अंदर चला भी जाता है तो वो वहां विकसित नहीं हो पाता. और बेकार होकर माहवारी के रक्त के साथ बाहर निकल जाता है. यहां तक तो हार्मोन की कहानी तसल्लीबख़्श है.
No comments:
Post a Comment